आज़ादी के सही मायने ..........





आज़ादी के सही मायने ..........



 
सर्वप्रथम आप सबको  स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई. 'आज़ादी' एक ऐसा शब्द है जो हममें सुकून, शांति , स्थिरता व सुरक्षा की भावना जाग्रत करता है. आज़ादी की बात करते हुए हम अक्सर मुल्क और हुकमरानों से इसका हिसाब माँगते हैं. पर प्रश्न यह उठता है कि क्या आज़ादी कोई बाहर से थोपी जाने वाली चीज़ है , जिसे आप जबरन किसी से ले ही लेंगे? मानते तो हम यही हैं पर असलियत में यह हमारे भीतर से ही आती है.

'स्व-तंत्र' का मतलब है हम पर हमारा ही शासन . 'इन-डिपेंडेंस' का भी मतलब है निर्भरता से मुक्ति. एक व्यक्ति के तौर पर हमारा खुद पर नियंत्रण हो और हम दूसरों के मोहताज न हों, तो यही स्वतंत्रता है, आज़ादी है. आज़ादी का सीधा तात्पर्य है हमारी ज़िंदगी से जुड़े सभी निर्णय लेने और विकल्प चुनने की पूरी आज़ादी . बाहर की दुनिया भांति-भांति के लोगों के संगम से बनी है. अलग-अलग लोग और आज़ादी को लेकर सबकी अलग-अलग धारणायें व सोच. हर कोई अपने ढंग से आज़ादी की व्याख्या करता है, आज़ादी को परिभाषित करता है.  

आज आज़ादी के इतने वर्षों के बाद भी लोगों की सोच, स्थितियों में ज्यादा सुधार नहीं आया. विकृ्त , संकीर्ण मानसिकता का अंत हो चुका है ..यह कहना स्वंय को धोखा देना होगा. हमारे आधुनिक समाज में , हमारे आज़ाद भारत में आज भी जेंडर डिसक्रिमिनेशन , बाल शोषण , सेक्शुअल हैरसमेंट , मॉलेसटेशन ,भ्रष्टाचार, महंगाई, अशिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी, बलात्कार, दहेज हत्या, अंधविश्वास , आतंकवाद, पर्यावरण समस्याऎं, कन्या भ्रूण हत्या, आनर किलिंग आदि परेशानियाँ विद्यमान हैं. और आज़ाद होने के बावजूद हम हमारे समाज को निरंतर खोखला करने वाले इन मुद्दों के खिलाफ कुछ नहीं कर पा रहे हैं , बस मूक दर्शक बने बैठे हैं. कारण वही है कि हम सोचते हैं कि हमारी आज़ादी हमें कोई और देगा ...हमारी आज़ादी की चाभी किसी और के पास है. कभी एक दिन ऐसा आएगा जब इन परेशानियों से हमारा समाज मुक्त होगा , आज़ाद हो जाएगा..... पर प्रश्न यह है कि आखिर वो दिन कब आएगा? इसका उत्तर साफ है....निसंदेह तब तक तो बिल्कुल नहीं जब तक हर व्यक्ति आज़ादी के सही मायनों को समझ, समाज की बंदिशों से , विकारों से मुक्त होने का स्वत: प्रयास नहीं करेगा.

एक इंसान के तौर पर हमें हमारे समाज को बेहतर बनाने के लिये प्रयासरत होना चाहिये. व्यवस्था को तो बहुत कोस लिया हमने , अब वक्त है कि जागरुक होकर हम समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें .

इसके अलावा जब बात आज़ादी कि हो रही है तो कुछ बातों को समझना बहुत जरुरी हो जाता है. ... स्वतंत्रता और स्वच्छंदता में बहुत अंतर होता है . आज़ाद होकर किसी कार्य को अंजाम देने पर हमें अधिकार प्राप्त होता है इसके विपरीत स्वच्छंदता से कार्य करने पर हमसे अधिकार छीन लिया जाता है. स्वतंत्रता का आधार नियम व अनुशासन में रहना है. आत्म अनुशासन का पालन करते हुए खुद अपनी स्वतंत्रता की सीमाएं निर्धारित करें, तभी व्यक्ति के साथ देश व समाज का भी विकास संभव होगा.
याद रखिये,
                  " सुधारेंगे खुद को तो सुधरेगा तंत्र,
                      देश में बदलाव का बस यही है मंत्र."

 

हम यदि सच में आज़ादी की एहमियत समझतें हैं तो स्वंय के भीतर भगत सिंह, रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चंद्र बोस, वीर शिवाजी को ढूढ़ने का प्रयास करें न कि पड़ोसी के घर इनके पुनर्जन्म की दुआ.




 

इन अहम मुद्दों के अलावा आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उस नामचीन शख्सियत की यदि बात नहीं की तो खुद से बेईमानी करने जैसा होगा . मैं बात कर रहा हूँ सिनेमा जगत के मशहूर सितारे  हमारे भरत कुमार,श्री मनोज कुमार जी की . फिल्म 'शहीद' में मनोज कुमार ने जिस शिद्दत से भगत सिंह के किरदार को जीवंत किया , उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता. 1967 में आई फिल्म 'उपकार' में उन्होंने हमारे देश के जवानों व किसानों के संघर्षों को दर्शाया जिसका गीत ' मेरे देश की धरती सोना उगले..उगले हीरे मोती' आज भी हमारे देश की गौरवशाली खूबियों व संस्कृ्ति की याद दिलाता है. मनोज कुमार ने सिल्वर स्क्रीन के जरिये  हमारे देश के गौरवशाली इतिहास व आज़ादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों व जवानों की भूमिका व बलिदान को जन-जन तक पहुंचाया है ..... वे सही मायनों में भरत कुमार हैं .....




 
आज की युवा पीढ़ी को मनोज कुमार से व उनकी देशभक्ति पर आधारित फिल्मों से प्रेरणा लेनी चाहिये .... मीनिंगफुल सिनेमा की यदि बात करें तो मनोज कुमार का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिये क्योंकि मनोज कुमार की देशभक्ति पर आधारित फिल्में इस तथ्य का साक्षात  उदाहरण हैं कि मनोरंजन का  अर्थ सिर्फ नाच , गाना, बजाना , रोमांस नहीं .....पर्वतों पर चढ़ कर सुंदर- सुंदर हिरोइनों पर प्रेम वर्षा कर अधेड़ हीरो के ठुमके हर वक़्त  दर्शकों का मनोरंजन प्रदान  नहीं कर सकते ....बल्कि ऐसी फिल्मों के जरिये जिस काल्पनिक दुनिया को दर्शकों के मनोरंजन के लिए परोसा जाता है , वह वास्तविकता से बिल्कुल दूर है.......... मनोरंजन के साथ - साथ हमें सिनेमा जैसे सशक्त माध्यम के जरिये उन लोगों को भी हर वक़्त याद रखना चाहिये जिनके अथक प्रयास के द्वारा ही हम आज आज़ादी का लुत्फ उठा पा रहे हैं . 



मनोज कुमार की देशभक्ति पर आधारित फिल्में हमें अपने देश से प्रेम करना सिखती हैं .... जो आज़ादी हमें मिली है, उस आज़ादी का मान रखना सिखाती हैं व अपने देश पर मर- मिटने की प्रेरणा देती हैं. ऐसे दक्ष व महान कलाकार को स्वतंत्रता दिवस पर हमारा सलाम !

आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका :
                                                      

                            - ऋषभ शुक्ल



copyright©2013Rishabh Shukla.All rights reserved
No part of this publication may be reproduced , stored in a  retrieval system or transmitted , in any form or by any means, electronic, mechanical, photocopying, recording or otherwise, without the prior permission of the copyright owner.
Copyright infringement is never intended, if I published some of your work, and you feel I didn't credited properly, or you want me to remove it, please let me know and I'll do it immediately.
 

Comments

  1. Fantastic thoughts . awesome art . happy independence day .

    ** Astha Nigam

    ReplyDelete
  2. अतुल बाजपई15 August 2013 at 03:06

    बहुत खूब
    आज़ादी को बहुत सुंदर शब्दों में बयां किया है आपने ऋषभ जी .
    आभार .


    - अतुल बाजपई


    ReplyDelete
  3. nice blog . keep it up . love the paintings .

    Pooja Gaur

    ReplyDelete
  4. Jatin kulkarni .15 August 2013 at 03:22

    happy independence day to you .
    great views .
    thanks for throwing light on so many important things to think about.

    love the portrait of manoj kumar .
    - Jatin kulkarni .

    ReplyDelete
  5. very well written and well presented blog. congrats
    - Versha Saxena

    ReplyDelete
  6. नवीन पाण्डेय15 August 2013 at 03:26

    बढ़िया लेख . बेमिसाल कला . बधाई व आभार !

    _ नवीन पाण्डेय

    ReplyDelete
  7. excellent use of words and art . you are a multi talented man .
    keep going . you inspired me a lot . Thanks!

    ^ Abhay Rajput

    ReplyDelete
  8. रुपाली दुबे15 August 2013 at 03:30

    स्वतंत्रता दिवस पर आपको बधाई .

    " पर्वतों पर चढ़ कर सुंदर- सुंदर हिरोइनों पर प्रेम वर्षा कर अधेड़ हीरो के ठुमके हर वक़्त दर्शकों का मनोरंजन प्रदान नहीं कर सकते ....बल्कि ऐसी फिल्मों के जरिये जिस काल्पनिक दुनिया को दर्शकों के मनोरंजन के लिए परोसा जाता है , वह वास्तविकता से बिल्कुल दूर है.......... मनोरंजन के साथ - साथ हमें सिनेमा जैसे सशक्त माध्यम के जरिये उन लोगों को भी हर वक़्त याद रखना चाहिये जिनके अथक प्रयास के द्वारा ही हम आज आज़ादी का लुत्फ उठा पा रहे हैं . "

    सटीक व बेहद प्रभावशाली पंक्तियाँ .................... बधाई

    - रुपाली दुबे

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Queen of Hearts : Divya Bharti

गायन , वादन तथा नृ्त्य कला .

Angel of Silver Screen, the Venus Queen : Madhubala