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Showing posts from February, 2013

गायन , वादन तथा नृ्त्य कला .

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गायन , वादन  तथा  नृ्त्य  कला .

भारतीय संगीत में गायन , वादन तथा नृ्त्य के साथ ताल संबंधी वाद्यों का प्रयोग न जाने कब से होता चला आ रहा है . उपलब्ध प्राचीन संगीत के इतिहास में हमें ताल संबंधी वाद्यों का प्रयोग कहीं-कहीं मिलता है . 




पौराणिक कथाओं में अनेक ताल वाद्यों की चर्चा की गई है . प्राचीन काल के जिन ताल संबंधी वाद्यों का उल्लेख मिलता है , उनमें आघाती, आदम्बर , वानस्पति, भेरी , दुर्दुर , ढोल, नगाड़ा तथा मृ्दंग या पखावज आदि मुख्य हैं. पखावज का प्रयोग तो आज भी कभी कभी देखने को मिलता है और ढोलक का प्रयोग उत्तर भारत के लोक गीतों के साथ खूब किया जाता है . आधुनिक युग के ताल संबंधी वाद्यों में सबसे प्रमुख स्थान तबले को प्राप्त है . इसकी उत्पत्ति के विषय में विद्वानों में अनेक मत हैं . कुछ के अनुसार प्राचीन काल के दुर्दुर नामक वाद्य का आधुनिक रुप तबला है . कुछ लोग तबले के जन्म का संबंध फारस के वाद्य तब्ल से जोड़ते हैं . कुछ लोगों का कहना है कि पखावज को बीच से काटकर तबले को जन्म दिया गया . बहुत दिनों तक बादशाह अलाउद्दीन खिलजी के काल के अमीर खुसरो को तबला के जन्मदाता का श्रेय प्राप्त होता रहा…

Kama Sutra Inspirations - 1

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Kama Sutra  Inspirations - 1

Love & Lust

Kama Sutra is an ancient Indian hindu text widely considered to be the standard work on human sexual behaviour in sanskrit literature written by Vatsyayana . A portion of the work consisits of practical advice on sexual intercourse .

Kama  which is one of the three goals of hindu life means sensual or sexual pleasure and ' Sutra ' literally means a thread or line that holds things together  and more metaphorically refers to an aphorism { or line, rule , formula } or a collection of such aphorisms in the form of a manual .

Some Indian philosophies  follow the four main goals of  life known as Purusharthas.

1- Dharma :   virtous living
2- Artha : Material prosperity
3- Kama : Aesthetic and erotic pleasure
4- Moksha : Liberation


Dharma , artha & kama are aims of everyday life while Moksha is a release from the cycle of death and rebirth .

In childhood, Vatsyayana says, a person should learn howw to make a living ; youth is the time for …

दोस्ती के नाम : 08

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दोस्ती के नाम :  08

' दोस्ती के नाम ' की आठवीं  श्रृंखला में आप सभी का हार्दिक स्वागत है. आज यह चिट्ठा समर्पित कर रहा हूँ अपने प्रिय मित्र 'श्री पंकज उपाध्याय ' जी  को. 'दोस्ती के नाम' की इस कड़ी को लिखते हुए मन एक बार फिर आनंद से भर उठा है . आज जिस शख्सियत से आप सभी को रुबरु कराने  जा रहा हूँ वे हैं - श्री पंकज  उपाध्याय जी.  

कानपुर विश्वविद्यालय से Biochemistry  में स्नातक व एम. बी. ए , 'पंकज' एक सफल उद्योगी हैं. 

श्वेत वर्ण , गंभीर व्यक्तित्व , सुडौल व गठीले शरीर वाले व विनम्र स्वभाव के पंकज उपाध्याय जी के Portraits को अपने ब्लॉग ' Rishabh Arts ' पर जगह देकर बड़ी ही प्रसन्नता हो रही है . पंकज जी के Portraits  बनाने के पीछे कारण सिर्फ उनकी ही मर्जी नहीं अपितु उनके भाई 'श्री दीपक शुक्ल' ने जब मुझसे उनके Portrait  बनाने की बात कही तो मैं , मना नहीं कर पाया . असल में दीपक इन Portraits को अपने भाई के समक्ष एक Surprise के तौर पर प्रस्तुत करना चाहता था . समय के अभाव के कारण काफी समय बीत गया पर दीपक की इस इच्छा को पूर्ण न कर पाने का अफसोस निरंत…

दोस्ती के नाम : 07

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दोस्ती के नाम :  07

'दोस्ती के नाम' की सातवीं श्रृंखला के साथ मैं, आप सभी के समक्ष एक बार पुन: उपस्थित हूँ. कुछ लोग वर्तमान का आनंद प्राप्त करते हैं और भूतकाल को विस्मृ्त कर देते हैं. वे उसी तक सीमित रहते हैं जिससे वे जुड़े होते हैं .... जिस पर उनकी नज़र नहीं पड़ती , उसे वे खोया हुआ मान लेते हैं....... लेकिन दूसरे इसमें ठोस आनंद का अनुभव करते हैं ....जीवन छोटा है . सच्ची दोस्ती के उदाहरण  प्रस्तुत करना एक अत्यंत कठिन कार्य  है लेकिन मैं , इस बात को उचित मानना हूँ कि वे दोस्त जो कभी न कभी आप के सच्चे  दोस्त थे या हैं , उनके नाम के प्रति व उनके प्रति स्मृ्ति बनाई रखी जाए.  क्योंकि दोस्ती की खट्टी - मीठी यादे .... पुरानी बाते हमारे वर्तमान को आनंददायक बनाती हैं ..खासकर तब जब हम कुछ खास क्षणों में उनका स्मरण करते हैं . उन लोगों को याद करना निश्चित रुप से आनंददायक होता है जो आपके हृ्दय के करीब है .....जो आपके लिए खास हैं.

आज स्मृ्तियों के बक्से का ताला खोल ' दोस्ती के नाम ' की इस कड़ी में आप सबका साक्षात्कार कराने जा रहा हूँ अपने प्यारे दोस्ते -' श्री अंकित दुआ ' जी से…

Queen of Hearts : Divya Bharti

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Bollywood Inspirations : Divya Bharti 





Queen of Hearts  : Divya Bharti


Divya Bharti (25 February 1974 – 5 April 1993) was an Indian film actress, whose acting variety hailed her as "the most interesting young actress of her generation" starring in a number of commercially successful Hindi, Telugu and Tamil films in the early 1990s. Bharti played a variety of character types; her film roles along with her screen persona contributed to a change in the concept of a Hindi film heroine.

After spending much of her childhood in Tapri, Bharti began a career as an actress in Telugu films with the 1990 Telugu film Bobbili Raja. Her early film appearances had her play little more than love interest of the leading actors, but she drew attention when she progressed to Hindi films of Bollywood in 1992 with Vishwatma. Bharti went onto have commercial success with films like Shola Aur Shabnam and Deewana that same year for which she garnered a Filmfare Award for Best Female Debut. Bharti had …