2012 गया , और 2013 आया !



2012 गया , और 2013 आया !


प्रिय दोस्तों ,
              नमस्कार !


आप सभी को नूतन वर्ष '2013' की ढेर सारी बधाईयाँ एवं शुभकामनायें.
'2012' हमारी सृ्ष्टि व समाज के लिये काफी घातक सिद्ध हुआ. कई प्राकृ्तिक आपदाओं से विभिन्न देश प्रभावित हुए. अपने देश भारत में भी कई राजनैतिक व सामाजिक परिवर्तनों व क्रांतियों से हमारा साक्षात्कार हुआ. वर्ष के अंत तक दिल्ली में चलती बस में एक 23 वर्षीय युवती के साथ हुए बलात्कार ने हम सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि हम किस समाज में रह रहे हैं और  क्या हम , हमारा अस्तित्व , हमारी अस्मिता , हमारी बहने-बहु- बेटियाँ, हमारे इस समाज में सुरक्षित हैं..... अभी हमारा देश इन प्रश्नों से जूझ ही रहा था कि उस पीड़िता की दर्दनाक मृ्त्यु ने हमें निशब्द कर दिया .....क्रांति की ज्वाला अभी बुझी नहीं किंतु हम सभी भारतवासी शर्मसार हैं, बेहद शर्मसार .........
प्रश्न फिर वही जिसका कोई जवाब नहीं कि आखिर कब तक .....कब तक ..... और कब तक इस तरह की धट्नायें होती रहेंगी?????? ....  और क्या ऐसी स्थिति में नव वर्ष की शुभकामनाओं व बधाईयों का कोई मतलब रह भी जाता है ??????

लेकिन फिर भी इस उम्मीद के साथ कि ईश्वर इस खूबसूरत सृ्ष्टि को बदसूरत नहीं होने देंगे ..... उस महाशक्ति ...... उस पराशक्ति से प्रार्थना करता हूँ कि सृ्ष्टि में फैली समस्त बुरी शक्तियों , बुरे कर्मों व  बुराई का जड़ मूल समेत सर्वनाश हो , नाश हो , विनाश हो , अंत हो , संहार हो और हम सभी मानवों को इतनी सदबुद्धि व शक्ति प्राप्त हो कि हम अपनी ज़िम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संपूर्ण कर जीवन पथ पर अग्रसर हों और विजयी हों. इस प्रार्थना के साथ एक बार पुन: आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनायें व बधाई.

2012 में मेरा ज्यादातर समय रचनात्मक कार्यों में व्यतीत हुआ ..... इस वर्ष अर्थात 2013 में , अपनी रचनात्मकता को Commercialize करने की कोशिश करुँगा. अधिकतर कार्य Commercial point of view  से करने की कोशिश रहेगी...... इस लिहाज से मेरे ब्लॉग्स में इस वर्ष जिन विषयों से आप सभी का साक्षात्कार होगा , वे कुछ इस प्रकार हैं :-

' Rishabh Interiors'  पर आप Vastu & Feng shui , Retail Design , Visual Merchadising, Business Design , Green Design  जैसे महत्तवपूर्ण विषयों की जानकारी प्राप्त करेंगे. 

चूंकि 'Rishabh Arts'  शुद्ध रुप से मेरी भावनाओं को उजागर करता है अत: इसका व्यवसायीकरण (Commercialization ) संभव नहीं.  अत: इस वर्ष इस ब्लॉग पर कम समय देने की योजना है . सीधे शब्दों में कहूँ तो आज के दौर में किसी की भावनाओं का किसी को न ख्याल है और ना ही इज्जत है . फिर भी Filmy Inspirations , Telly Inspirations, Death Inspirations, Illusion & Kaamsutra Inspirations से संबंधित चिट्ठों से आप सभी पर कला की बौछार होने की संभावना है.

'Rishabh Views on Modern Society'  में इस वर्ष ओला वृ्ष्टि होने की संभावना है जिससे कई लोगों के सिर फूट्ने की आशंका बनी रहेगी . तो मुझ पर एक अहसान करियेगा कि थोड़ा सा सावधान रहियेगा. चूंकि पिछले वर्ष की कुछ घट्नाओं ने हमारे आधुनिक समाज को और अधिक गर्त की ओर ढकेल दिया है....तो जाहिर सी बात है ऐसी स्थिति में हम लेखकों का सारा frustration हमारी कलम के जरिये ही निकलेगा . और 'कलम' ऐसी खतरनाक बला होती है जो बिना रक्त बहाये न जाने कितनों के सिर धड़ से अलग करने की क्षमता रखती है .
 मैं ,लोगों के रवैये पर बड़ी बारीकी से नज़र रखता हूँ ताकि धोखा खाने से बच सकूँ और  बड़े ही शर्म के साथ कहने को मजबूर हूँ कि हमारे सामाज में अधिकतर लोग तमीज़, तहजीब, जुबान की हदें भूल ही गए हैं .... चाहे सोशल नेट्वर्किंग की बात हो या आपके आस-पास की दुनिया ...... बस हर चौथे बंदे से बक%#@  करवा लो और उनकी बेतुकी बक@#&* के बदले जो उन्हें जूते पड़ते है ,उससे भी उन्हें तनिक भी शर्म नहीं आती ..... ऐसे लोगों से आप सभी का भी कभी ना कभी सामना हुआ होगा .... ऐसे स्पेशल बेशर्म लोग जूते खाते जाते हैं और धरती पर बिना किसी शर्म के बोझ बढा़ते जाते हैं ...... उन्हें शायद उनकी बेज्जती का अहसास ही नहीं होता...... अत:  'ज़मीन, ज़ुबान, तमीज़ व तहज़ीब' नामक लेख की विभिन्न नई श्रृंख्लायें आप सभी के समक्ष प्रस्तुत होंगी ..... आप सभी मेरे प्यारे मित्र जनों से विनम्र निवेदन् है कि अपने बहुमूल्य विचारों द्वारा अपना प्रेम मुझ पर लुटाते रहियेगा .....

अंत में अपने प्यारे पाठकों के लिये दिल से  मेरी बस यही दुआ है कि,
             " यदि दुआओं का असर होता है कुछ ,
                    तो बहारों में बसर हो , ज़िंदगानी आपकी. "





आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका

                                                   - ऋषभ शुक्ल


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Comments

  1. very well written ...... looking forward for more blogs
    -Ananya

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  2. गौतम करन वर्मा1 January 2013 at 03:26

    तीखे कलम के तीखे वार .... 'जमीन, जुबान, तमीज व तेह्जीब 'के लेखों का इंतजार रहेगा. - गौतम करन वर्मा .

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  3. nice plans ......its gonaa be veryy interesting ..so i am going to bookmark all of yours blogs ....... thanks for spreading knowledge
    -mithlesh bajpai

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  4. very interesting & sarcastic way of writing .i love you & your blogs :P

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  5. अनुपमा सेन1 January 2013 at 03:36

    हर सुंदर वस्तु का व्यवसायीकरण आवश्यक नहीं....आज भी कुछ लोग हैं जिन्हें भावनाओं की कद्र है पर फिर भी आपने जो लिखा है वो हमारे समाज का आइना है ..एक्दम साफ आइना जिसका अक्स बेहद खौफनाक है.
    -अनुपमा सेन, कोलकाता.

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  6. जोगिंदर सिंह1 January 2013 at 03:41

    कम शब्दों में संकीर्ण मानसिकता के व्यक्तियों के लिये तमाचा मार प्रस्तुति . शब्द कम हैं पर अर्थ बहुत गहरा .भविष्य में आप लेखन क्षेत्र में बहुत नाम करेंगे .
    - जोगिंदर सिंह

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  7. very positive start thru a positive blog.....
    aage be ese hi sundar blog ki kamna krte h...
    happy new year...

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