Friday, 7 December 2012

My Life In Paintings

My Life In Paintings




" Art is not only my life but its also my wife ".......

जी हाँ, कला का मेरी ज़िंदगी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है ........ खासतौर पर यदि चित्रकला की बात की जाए तो बचपन से ही इसकी ओर मेरा गहरा झुकाव था. ....... आज पेशे से मैं, एक इंटीरियर डिज़ायनर हूँ ...... और पूरी कोशिश करता हूँ कि अपने क्लाइंट्स की आवश्यकताओं के अनुसार उनके लिविंग स्पेस को एक बेहतरीन कलात्मक परिवेश में ढाल सकूँ........ मेरे अनुसार किसी स्थान के वातावरण को खूबसूरत व सजीव बनाने के लिये कलात्मक वस्तुओं की अहम भूमिका होती है. फिर चाहे वो पेंटिंग्स हों, आर्टिफेक्ट्स , मूर्तियाँ, फर्नीचर आदि पर की गई नक्काशी या डेकोरेटिव फिक्सचर्स  एवं फिटिंग्स आदि हों........ कुल मिलाकर इस बात में तनिक भी  संदेह नहीं कि 'कला' हमारे आसपास के वातावरण को जीवंत करती है, खुशियाँ बिखेरती है........ कला के बिना एक खूबसूरत जीवन व जीवन शैली की कल्पना करना भी असंभव है........खूबसूरत ज़िंदगी का आधार 'कला' ही है.

मेरी ज़िंदगी भी कलात्मक वातावरण से घिरी हुई है........मुझे विभिन्न कलाओं जैसे चित्रकारी, फोटोग्राफी, लेखन व संगीत में बेहद दिलचस्पी है........मेरे कैरियर की शुरुआत दिल्ली की एक प्रतिष्ठित कंपनी में बतौर इंटीरियर डिज़ायनर के रुप में हुई ........ पहली नौकरी........पहली सैलरी........ पहला बॉस........पहला प्रॉजेक्ट........इन खूबसूरत यादों को , पलों को , वक़्त को मैं, अपनी मुट्ठी में कैद करना चाहता था. पर वक़्त को भला कौन बाँध पाया है........वक़्त तो गतिशील है. अत: अपनी ज़िंदगी के इन अनमोल पलों को संजो कर रखने के लिये मैंने एक रास्ता निकाला........जब भी कोई पल मेरे लिये कुछ खास सा होता, मैं तुरंत अपने मोबाइल कैमरे द्वारा उस समय, उस वातावरण  को कैपचर कर लेता ........यह प्रक्रिया सालों साल चलती रही.

आज मैं, फ्रीलॉन्स डिज़ायनर के तौर पर सक्रिय हूँ व '10 -6 टाइमिंग' वाली जॉब से मुक्त हूँ........तो अपने लिये कुछ समय निकाल पाने में खुद को समर्थ महसूस करता हूँ और  कभी- कभी जब काम का भार कुछ कम होता है तब , चाय की चुसकियों के साथ अंधेरे कमरे में तन्हा मैं, मेरा लैपटॉप और मेरे प्यारे चाय के प्याले के साथ देर रात तक उन खास पलों को याद करता हूँ ........इससे मुझे एक Satisfaction मिलता है ........कि ईश्वर की कृ्पा से ज़िंदगी के अभी तक के सफर में जो पाया, जो कार्य किये ........वे सब उचित थे........पीछे मुड़ के अपनी ही ज़िंदगी के सफर को देखता हूँ तो बेहद आत्म संतुष्टि होती है........
ऐसे में एक दिन अचानक मन में विचार आया कि क्यों न अपनी ज़िंदगी की इन बेहतरीन यादों को और अधिक स्पेशल बनाया जाए ........क्यों न अपनी  ही ज़िंदगी के उन खास पलों को पेंटिंग्स में रुपांतरित किया जाए.
मेरे इस विचार के पीछे की वज़ह साफ थी कि जब मैं, बुढ़ढा ( बुढ़ऊ ) हो जाऊँगा तो मेरे बच्चे मेरी और मेरी ज़िंदगी के कुछ खास पलों की तस्वीरें देखें और इस बात को समझें कि वाह ! मेरे पिताजी जवानी में कितने रंगीन मिजाज़ थे...... { हा हा हा हा....... }


वैसे हँसी - मज़ाक से परे सच्चाई तो यह है कि जब आपकी ज़िंदगी ही  आपकी कला की प्रेरणा बन जाए तो इससे बेहतर और कुछ नहीं होता ........ आप हर वक़्त पूरी शिद्द्त से यह कोशिश करते हैं कि अपनी ज़िंदगी को भी  आप उतनी ही हसीन बनायें जितनी लगन से आप अपनी पेंटिंग्स को हसीन व खूबसूरत बनाने की ज़द्दोजेहद करते हैं........ वैसे भी कला का असली मतलब अपने Expressions अर्थात अपने भावों को प्रकट करना होता है. और अपनी खुद की ज़िंदगी को पेंटिंग्स में रुपांतरित करना व देखना सच में बेहद अदभुत व खूबसूरत एहसास है..................

आपको 'मेरी ज़िंदगी पेंटिंग्स में' अर्थात 'My Life In Paintings' कैसी लगी........इस पर अपने विचार जरुर प्रकट कीजियेगा........ और जब तक मैं, नई पोस्ट अपडेट न करुँ तब तक अपना ख्याल रखियेगा........ मुझे और मेरे ब्लॉग्स को हर दम हर पल याद रखियेगा........ अपनी ज़िंदगी को खुशहाल रखियेगा........मेरे लिये अपने दिल में थोड़ा सा ही सही मगर प्यार रखियेगा........





























आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका :
                                                 
                                                                             - ऋषभ शुक्ल


Note : Cigarette smoking is injurious for health


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