दोस्ती के नाम : 05


 दोस्ती के नाम : 05

दोस्ती के नाम की पाँचवी  श्रृंखला में आप सभी का हार्दिक स्वागत है. आज यह चिट्ठा समर्पित कर रहा हूँ अपने प्रिय मित्र श्री ' उमेश पाल ' जी को.

" दोस्ती का जहाँ था, मोहब्बत की फिज़ा थी,
दुश्मनी क्या होती है , किसको पता थी.
हर तरफ पल- पल ज़िंदगी मुस्कुराती थी ,
मानो पुष्प बगिया में हर सुबह खिल उठते हों,
नज़र ही नज़र में  दोस्ती हो जाती थी,
एक ही पल में खुशियों की दुनिया बस जाती थी........."

 

स्वप्निल जी की कविता ' अपूर्वा ' की ये पंक्तियाँ मुझे अक्सर यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि सच में, हमारे बचपन में हमारी सोच कितनी पाक- साफ, निष्कपट, छल रहित , मासूमियत और भोलेपन से भरी होती है ...... ज़िंदगी की उस अवस्था { स्टेज } पर दुनिया बहुत खूबसूरत होती है व लगती है . ये तो मानव बुद्धि है कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है....... कहीं न कहीं , कभी न कभी भिन्न- भिन्न विकृ्तियाँ हमारे मन-मस्तिष्क में जगह बनाने लगती हैं और हमारी सोच पर  दुश्मनी, इर्ष्या, द्वेष , लालच, क्रोध, नीचता आदि विकार समा जाते हैं. परंतु ऐसे लोगों को आप क्या कहेंगे जो बाल्यावस्था से युवावस्था में आकर भी अपने भीतर मानवता, मधुरता, धैर्य,  संयम,  ईमानदारी, विनम्रता, बच्चों सी मासूमियत व भोलापन , सरलता व सिंप्लिसिटि जैसे सदगुणों को कायम रखने में सफल होते हैं और अपनी ज़िंदगी में सफलता के सर्वोच्च शिखर पर आसीन होते हैं. ......... नि:संदेह ऐसे लोग औरों की तुलना में अलग होते हैं व उन पर ईश्वर का साक्षात हाथ होता है.  और मैं , बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहूँगा कि मेरा प्रिय दोस्त ' उमेश ' ठीक वैसा ही है जैसा कि मैंने उदाहरण प्रस्तुत किया .

सरल, विनम्र, मधुर, धैर्यवान, परिश्रमी, मासूम, ईमानदार व सहयोगी .......... यह चंद शब्द पूरे तो नहीं पड़ते उमेश की शख्सियत को बयां करने के लिये पर शायद उमेश के व्यक्तित्व को रेखांकित करने की क्षमता तो ये शब्द रखते ही हैं.



'उमेश ' से मेरी मुलाकात कक्षा 8 वीं में हुई थी { 8वीं- ' स ' } . उसके विनम्र व सहयोगी स्वभाव का मैं सदैव सम्मान करता हूँ. उमेश एक ऐसा युवक है जिसको मैंने पल- पल आगे बढ़ते देखा है.  यदि मैं कहूँ कि ' उमेश ' अपने आप में इस बात का साक्षात  उदाहरण है कि सही दिशा में कड़ा परिश्रम करने वाले, दूसरों के साथ अच्छाई करने वाले व दूसरों के लिये सकारात्मक भावना रखने वाले व्यक्ति ज़िंदगी में सदैव उच्च स्तरीय सम्मान व सुख - शांति प्राप्त करते हैं , तो यह किसी भी प्रकार से अतिशयोक्ति नहीं होगी.


8वीं कक्षा की ही बात है .......एक दिन मैंने उमेश से पूछा कि " तुम्हारा ambition क्या है? तुम भविष्य में किस field में जाना चाहोगे ?" ........ उमेश ने मुझे उत्तर दिया कि , " ऋषभ ! मेरा यह सपना है कि मैं इंजीनियर बनूँ और अपने माँ- बाप का नाम रौशन करुँ ." ............ और मुझे इस बात की बेहद प्रसन्नता है कि उमेश ने अपने सपनों को हकीकत में तबदील कर लिया है...... उमेश आज  पेशे से एक इंजीनियर है. उसने जो सपने देखे उन्हें अपने दम पर सच किये. उसने अपने आप से किया गया वादा निभाया ..... अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया...... और मैं बिल्कुल भली- भाँति समझ सकता हूँ कि यह उमेश के साथ - साथ उसके माता- पिता के लिये भी बेहद गौरव का विषय होगा जब उनके बच्चे ने वो कर दिखाया जिसका सपना उसने बचपन से देखा था. ......
10वीं कक्षा के बाद उमेश ने विज्ञान संकाय चुना और मैंने वाणिज्य संकाय ..... अलग विषय व कक्षा होने के कारण हमारी बातचीत कम जरुर हो गयी थी पर हृ्दय में एक दूसरे के प्रति प्रेम व सम्मान परस्पर बना रहा. ' दोस्ती के नाम ' की 5वीं श्रृंखला में उमेश के साथ मेरी दोस्ती की यादों को ताजा कर मन हर्षोल्लास से भर उठा है....... मैं अपने प्रिय मित्र ' उमेश के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ और हमारी ये सच्ची दोस्ती जीवनपर्यंत बनी रहे , ईश्वर से बस यही कामना करता हूँ.




अंत में उमेश से यही कहना चाहूँगा कि :

ऎ दोस्त,
बहारों में बसर हो ज़िंदगानी आपकी ,
फूलों सी महके ज़िंदगानी आपकी ,
सूरज की तरह चमकते रहें आप ,
हर पल रौशन हो  दुनिया आपकी,
दुआ तो मेरी बस इतनी ही है कि
खुशियों की हर चाभी मुट्ठी में हो आपकी
बहारों में बसर हो ज़िंदगानी आपकी ,
फूलों सी महके ज़िंदगानी आपकी .


आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका :


                                                      - ऋषभ शुक्ल

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Comments

  1. gud one man...as expected...ultimate...

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    1. thanks a lott archit .....plz keep visiting ...your comments are precious for me

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  2. 'dosti ke naam ' series rocks.
    -Sudeep Kumar

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    1. thanks sudeep kumar .....plz keep visiting

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  3. impressively great article & of course, art ....... no words ..just FANTASTIC .....keep it up.

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    1. thanks dear reader ....plz keep visiting :-)
      plz do mention your name while choosing the profile Anonymous.
      thanks

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  4. hats off to u rishabh...pakke kalakaar ho bhai..

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