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Showing posts from November, 2012

GUEST POST : Home decor collection

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Dear blog audience ..... here is a home decor collection by Miss 'Swapnil Shukla' ..The collection is really amazing .......friends are also invited to share their creative stuff through this blog...... Cheers !!!!!Home decor collection
Through this post ..I am going to throw light on ' home decor items ' of your signature style ..... I am sharing few pics of my collection of home decor range designed for my personal use which includes few handicrafts, candles, paintings, crochet , soft toys, matty work etc.  Before we go ahead, first lets understand the meaning of few terms : 
Decor : the style of furniture, wallpaper, carpeting, curtains, and accessories chosen for a room or house 

Handicraft : object made by hand: something made using manual skill 

Crochet :  form of needlework used to make clothes or decorative items from wool or thick stiff thread, by looping it through itself with a special hooked needle crochet hook 


Home decor collection designed by Swapnil S…

दोस्ती के नाम : 05

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दोस्ती के नाम : 05

दोस्ती के नाम की पाँचवी  श्रृंखला में आप सभी का हार्दिक स्वागत है. आज यह चिट्ठा समर्पित कर रहा हूँ अपने प्रिय मित्र श्री ' उमेश पाल ' जी को.

" दोस्ती का जहाँ था, मोहब्बत की फिज़ा थी,
दुश्मनी क्या होती है , किसको पता थी.
हर तरफ पल- पल ज़िंदगी मुस्कुराती थी ,
मानो पुष्प बगिया में हर सुबह खिल उठते हों,
नज़र ही नज़र में  दोस्ती हो जाती थी,
एक ही पल में खुशियों की दुनिया बस जाती थी........."


स्वप्निल जी की कविता ' अपूर्वा ' की ये पंक्तियाँ मुझे अक्सर यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि सच में, हमारे बचपन में हमारी सोच कितनी पाक- साफ, निष्कपट, छल रहित , मासूमियत और भोलेपन से भरी होती है ...... ज़िंदगी की उस अवस्था { स्टेज } पर दुनिया बहुत खूबसूरत होती है व लगती है . ये तो मानव बुद्धि है कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है....... कहीं न कहीं , कभी न कभी भिन्न- भिन्न विकृ्तियाँ हमारे मन-मस्तिष्क में जगह बनाने लगती हैं और हमारी सोच पर  दुश्मनी, इर्ष्या, द्वेष , लालच, क्रोध, नीचता आदि विकार समा जाते हैं. परंतु ऐसे लोगों को आप क्या कहेंगे जो बाल्यावस्था से युवावस्था मे…

दोस्ती के नाम : 04

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दोस्ती के नाम : 04

दोस्ती के नाम की चौथी सिरीज़ ( श्रृंखला )  लिखते हुए बेहद प्रसन्नता का अहसास हो रहा है और हो भी क्यों न इसके जरिये चंद पलों के लिये ही सही पर् मैं उन खूबसूरत यादों व पुराने समय में वापस चला जाता हूँ जहाँ मेरी मुलाकात उन व्यक्तियों से हुई जो देखते ही देखते मेरे हृ्दय के करीब हो गए.  उनकी यादें मेरे लिये खास बन गई . और शायद उन लोगों के लिये भी दोस्ती की खट्टी- मीठी यादें उतनी ही खास है जितनी मेरी लिये हैं.

आज टाइम मशीन पर सवार होकर एक बार पुन: अपने स्कूल डेस में आ गया हूँ......................

11वीं कक्षा ...... वाणिज्य संकाय....... नया सत्र.........पहला दिन...... मैं विद्यालय के निश्चित समय से थोड़ा पहले ही विद्यालय में प्रवेश कर चुका था. 11वीं -  'ब' कक्षा से मेरी शिक्षा की नई शुरुआत होनी थी . नए दोस्त बनने थे . नई कहानियाँ बननी थीं व रचनी भी थीं.  कक्षा का ताला खुला था.  मैंने दरवाज़े को खोला ....... सन्नाटा ......हर ओर सन्नाटा छाया था..... घोर सन्नाटा और सन्नाटे को चीरती सनसनी दस्तक दे रही थी. .....वो भी मेरे रुप में. हा हा हा हा.........

कक्षा की दहलीज़ पर खड़े…