दोस्ती के नाम : 03






 दोस्ती के नाम : 03

ज के दौर में सोशल मीडिया अर्थात फेसबुक, आरकुट, ब्लॉगिंग, ट्विटर आदि के जरिये हम लोग एक ही पल में दुनिया के न जाने कितने की लोगों से संपर्क साधने में सक्षम हैं...... ज़माना आगे बढ़ रहा है ....... लोगों की सोच में इजाफा हो रहा है...... विचार बदल रहे हैं .......हमारा समाज नए व सकारात्मक बदलावों का साक्षी बन रहा है. कई चीज़ों की पारंपरिक परिभाषाओं के मायने भी बदल रहे हैं....
आज फेसबुक जैसी सोशल नेट्वर्किंग साइट्स के माध्यम से हम अपने प्रोफाइल में अपने मन मुताबिक दोस्तों का चुनाव करते हैं ..... उनसे फेसबुक के जरिये ही हर रोज मिलते हैं...... उनसे बातचीत करते हैं...... अपने विचार , ज़िंदगी , फोटोस आदि शेयर करते हैं........ यह सब अमूमन हम सभी को एक सुखद अहसास कराता है ....... कितनी अजीब बात है , आज से कुछ समय पूर्व दोस्त परस्पर एक दूसरे से मिलते थे ....... बातचीत होती थी ....... रुठना- मनाना ........ घंटों एक साथ बैठ कर गप्पे मारना ........चाय- कॉफी की चुसकियाँ लेना....... समय मिलने पर एक दूसरे से मिलने जाना ....... वो दोस्ती का प्यार व सम्मान भरा स्पर्श ....... गले मिलना........ सुख-दुख में हर वक़्त साथ रहना आदि........ आज भी ये सब होता है पर फेसबुक जैसी सोशल नेट्वर्किंग साइट्स के द्वारा जहाँ प्रत्यक्ष तौर पर हम अपने दोस्तों के साथ जुड़ नहीं पाते......... वैसे तो आज के समय में कुछ भी असंभव नहीं वेब कैम की मदद से हम एक दूसरे को देख सुन भी सकते हैं पर ज्यादातर chating द्वारा ही हम अपने दोस्तों से जुड़े रहते हैं.  परंतु ऐसी दोस्ती में हमें  दोस्ती का प्रत्यक्ष अह्सास व अनुभव नहीं होता जिसके परिणामस्वरुप फेसबुक पर बने दोस्तों से भावनात्मक स्तर पर हमारा जुड़ाव उतना नहीं हो पाता जितना हमारे स्कूल-कॉलेज आदि के दोस्तों से होता है...... पर फिर भी इन्हीं फेसबुक दोस्तों की हजारों की भीड़ में कुछ ऐसे भी दोस्त मिल जाते हैं जो प्रत्यक्ष तौर पर तो आपके साथ नहीं होते ........ शायद उनका साथ चंद घंटों तक का ही हो ........ उनसे आपकी बातचीत चाहें हर रोज हो या महीने में सिर्फ एक बार ...... पर फिर भी उनकी बातें ........ उनके ख्याल ....... उनके विचारों से इतना लगाव हो जाता है कि वो दोस्त जिसे आप सही से जानते तक नहीं ....... कभी वही आपकी ज़िंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन जाते हैं. आपके लिये खास बन जाते हैं .... ऐसे दोस्तों से आपको किसी चीज़ की अपेक्षा नहीं होती , न उन्हें आपसे........शायद ये भी पता हो कि ज़िंदगी में हम कभी एक दूसरे से प्रत्यक्ष तौर पर न मिलें पर फिर भी उनकी बातें दिल को छू जाती हैं........


आज के समय में जहाँ हर ओर गला काट प्रतिस्पर्धा , छल कपट आदि को देख मन विचलित हो जाता है ....... वहीं एक अपरिचित दोस्त के द्वारा भेजी गई अथवा टैग की गई एक फोटो या उनके विचारों द्वारा आपकी ज़िंदगी नई उमंगों व ऊर्जा से भर जाती है......... यदि इसकी गहराई में जाएं तो यह सब बेहद अदभुत व रोमांचित कर देने वाली बातें व अहसास है.


उपरोक्त बातों का संदर्भ यदि स्वयं से जोड़ूं तो मैं, यह बताना चाहूँगा कि वैसे तो मैं ढेरों दोस्त बनाने में यकीन नहीं रखता  पर हाँ , इस बात पर जरुर विश्वास करता हूँ और ये मेरा उसूल है कि यदि किसी को दोस्त मानो तो उससे दोस्ती निभाओ और यदि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि किसी दोस्त के साथ आप दोस्ती निभाने में सक्षम नहीं तो तुरंत उसे 'दोस्ती' नामक रिश्ते से मुक्त कर देना ही उचित होता है ताकि भविष्य में उस व्यक्ति से आपको या उसको आपसे किसी भी प्रकार की कोई अपे़क्षायें न रहें.
खैर, फेसबुक में ज्यादातर मेरे दोस्तों को मैं पहले से ही जानता हूँ...... कुछ स्कूल डेस से मेरे साथ हैं....... तो कुछ प्रोफेशनल स्ट्डीस के समय से साथ हैं ..... तो कुछ दोस्त ऐसे हैं जिन्हें किसी category में नहीं बाँट सकते ....... पर कुछ दोस्त ऐसे हैं जो सिर्फ फेसबुक के माध्यम से ही मेरे दोस्त बने हैं ........ और उनमें से भी कुछ बेहद कम समय में ही मेरे लिये खास हो गए हैं........ जिनमें से 'अमनदीप ' भी एक है. 


'अमनदीप'- सुडौल, सुगठित देह का स्वामी, राजसी व्यक्तित्व , सुंदर व नट्खट , भोला- मासूम चेहरा , स्वतंत्र विचार , बेधड़क , कटीली आँखें , मीठी बातें करने वाला व मस्त- मौला.......
अमनदीप का उपरोक्त व्यक्तित्त्व विश्लेषण मेरी अभी तक हुई उससे बातचीत के आधार पर मैंने किया है . उम्मीद है अमनदीप अपने व्यक्तित्व के आगे जुड़े इन विशेषणों से गद-गद हो गया होगा . चेहरे पर भीनी सी मुस्कुराहट आ गई होगी और दिल बाग-बाग { Garden-garden  } हो गया होगा . 


अब इसे क्या कहूँ अमनदीप की शख्सियत या मेरी लेखनी का जौहर ....... खैर, इसमें कोई संदेह नहीं कि दोनों चीज़ें ही सर्वश्रेष्ठ हैं , बेहतरीन हैं व बेहद उमदा हैं- मेरी लेखनी भी और अमनदीप का व्यक्तित्व भी.
अमनदीप , पेशे से फैशन डिज़ायनर है ...... जिसकी झलक उसके व्यक्तित्व में साफ नज़र आती है ....... वैसे  तो हम सभी डिज़ायनर्स में यह खास बात होती ही है कि अपने प्रोफेशन पर फक्र व डिज़ायनर होने का गौरव हमारे व्यक्तित्व में साफ झलकता है .


अमनदीप एक ऐसा व्यक्ति है जो हर ओर प्रेम फैलाना जानता है .......यदि आप अमन की फोटोस देखें तो आपकी नज़र अमनदीप द्वारा डिज़ायन की हुई एक ड्रेस पर जाएगी, जिसमें उसने डिज़ायन के तौर पर ' Save Girl Child '  जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को अपने गारमेंट के साथ coordinate कर डिज़ायन  किया था. यह अमनदीप की बेहद सराहनीय प्रस्तुति है जो उसकी कलात्मक व रचनात्मक सोच के बेहतरीन स्तर के साथ -साथ उसकी सकारात्मक सोच को भी उजागर करती है.......





अमनदीप एक कला प्रेमी व्यक्ति है ....... सालसा डाँस में उसे विशेष रुची है ....... अब ये बताने की जरुरत तो नहीं कि काफी रोमांटिक किस्म के हैं मेरे दोस्त - श्री अमनदीप जी...... इसके उलट मुझे तो आप में से बहुत से लोग जानते ही होंगे और नहीं जानते तो मेरे ब्लॉग्स पढ़ कर जान सकते हैं कि मैं , लड़ाकू, खड़ूस, हठीला , जिद्दी ,गालियों में Ph.D होल्डर , खूंसट व बेहद स्मार्ट व सेक्सी व्यक्ति हूँ और इस लिहाज से मुझमें और अमनदीप में सिर्फ एक ही समानता है कि हम दोनों ही बेहद स्मार्ट हैं ....... बाकी एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न व्यवहार होने के बावजूद हम एक दूसरे के अच्छे दोस्त हैं....... मैं कह सकता हूँ बल्कि बेहद फक्र के साथ कह रहा हूँ कि अमनदीप की दोस्ती मेरे लिये खास है ...... मुझे पता है कि हम लोग अपनी - अपनी ज़िंदगी में बहुत खुश हैं और शायद ही  हम एक दूसरे से कभी प्रत्यक्ष तौर पर मिल पाएं पर बस एक दूसरे के प्रति प्रेम व सम्मान बना रहे और हमारी अप्रत्य़क्ष दोस्ती जीवन पर्यंत अप्रत्यक्ष होने के बावजूद् प्रत्यक्ष बनी रहे, बस यही कामना है...... सीधे शब्दों में कहूँ तो , अमनदीप की जगह मेरे हृ्दय में इतनी खास हो गई है कि उससे बातचीत कर बस मन-मस्तिष्क में अमन के दीप जल उठते हैं और मैं, ईश्वर से यही प्रार्थना करुँगा कि अमन के दीप हमारी अनोखी दोस्ती में भी जीवन भर जलते रहें जिनकी रोशनी दोस्ती के इस अनमोल रिश्ते को संजो कर रखने की हमें शक्ति प्रदान करती रहे..........










आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका :

                                    - ऋषभ शुक्ल


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Comments

  1. rishabh ...really yaar great work....u have very good knwledge of all relationships .......friendship is really a very true relation ...aur aapne behad umadaa tareeke se ise express kiyaa hai ....hats off to u ..............

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  2. nice blog.....true defintion of friendship..congr8

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  3. ऋषभ ,
    बेहद सराहनीय प्रस्तुति ... कला के तो आप उस्ताद हैं ही .यदि ये कहूँ कि आपके हाथों में साक्षात ईश्वर का वास है तो गलत नहीं होगा....क्योंकि इतनी सारी कलाओं से ईश्वर ने आपको अलंकृ्त किया है और आप ईश्वर की हर कला के साथ पूर्ण्तया न्याय भी कर रहें हैं चाहे बात आपकी पेंटिंग्स की हो या लेखनी की आदि ...यह तो साफ है कि आपको ईश्वर ने विभिन्न वरदानों से सुशोभित किया है ......आपको हर रिश्ते की इतनी गहराई से समझ है ....कि कभी कभी आपके लेखों का हर एक शब्द हमें अचंभित कर देता है कि अखिर कैसे इतने उचित , तर्कपूर्ण व सहज तरीके से रिश्तों, कला, शब्दों व दार्शनिकता के संगम को अपनी लेखनी के धागे में पिरो कर प्रस्तुत कर देते हैं आप.....कितना खूबसुरत विश्लेषण व प्रस्तुतिकरण ...... अपने लेख 'दोस्ती के नाम' की सीरीस को कृ्प्या आगे बढ़ाइयेगा और यदि हो सके तो ज़िंदगी के अन्य रिश्तों के बारे में आपकी सोच क्या है ? इस से भी अपने पाठकों को अवगत करायें ...... शुभकामनाओं सहित बधाई.

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  4. great work & great approach towards friendship
    - Riteeka

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